घनश्याम भाई, यही नाम उन्होंने अपना बताया था ऑटो की करीब 40 मिनट की यात्रा के दौरान । आज सुबह ही IIT गांधीनगर से अहमदाबाद शहर के लिए निकल गए । गांधीनगर से तो संसथान की बस ही मिल गयी थी, संसथान के पुराने कैंपस पर बस ने उतार दिया । वहां से अहमदाबाद अभी करीब 7 किलोमीटर और भी था । सामने ही एक ऑटो नजर आया । ऑटो वाले भाई ने पूछा कि कहाँ जाएंगे मैंने बताया कि होटल ओएसिस, बोले बैठ जाओ, 90 रूपये लगेंगे । मैंने थोड़ा सशंकित होते हुए बोला कि मीटर से चलेंगे । खैर हम बैठ गए, बैठते ही उन्होंने अपना नाम बताया, घनश्याम भाई, बोले कि आपका क्या काम था, मैंने बता दिया कि एक इंटरव्यू था, बोले M tech और PhD के इंटरव्यू तो हो चुके, मैंने कहा मेरा तो नौकरी के लिए था । उन्होंने मुझे बोला आप अपने मोबाइल में IIT Gandhinagar ki वेब साइट खोलो उसमे मेरा नाम मिलेगा । मैंने उनको टालने वाले अंदाज में बोल दिया कि मेरा मोबाइल बंद है और वैसे भी रोमिंग में हूँ । भाई बोले कोई नहीं फिर देख लेना । उसके बाद उनके साथ बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया । बोले में पिछले 38 साल से ऑटो चला रहा हूँ तथा ज्यादातर IIT se ही स्टूडेंट्स और प्रोफेसर लोगों को रेलवे स्टेशन या हवाई अड्डे पर छोड़ता हूँ । रात रात को लड़कियों को भी सेफ्टी से हवाई अड्डे पर छोड़ता हूँ, सभी का बहुत ही भरोसा है उन पर इसलिए उनका नाम वेब साइट पर भी डाला गया है । मैंने पूछा, बच्चे तो सेटल हो चुके होंगे उनके, बोले 03 बेटे हैं, सबसे बड़ा, न्यू jersy, अमेरिका में है, एक किसी नौकरी में है और तीसरे पढाई कर रहा है । मुझे आश्चर्य हुआ, बेटा अमेरिका में, मैंने पूछा कि कितना पढ़ कर गया अमेरिका, बोले मेरी ही तरह बी कॉम किया है । मुझे फिर से आश्चर्य हुआ, मैंने सोचा इंजीनियर होगा । यह पूछने पर कि अमेरिका गया कैसे ? बोले कि उसकी ससुराल वाले ले गए । मुझे अच्छा लगा । फिर उन्होंने एक कहानी भी सुनाई । इसी बीच हमारा गंतव्य भी समीप आ गया, घनश्याम भाई ने खुद ही पूछ कर हमें सही स्थान पर पहुंचा दिया । बोले कि अब 10 दिन के लिए बड़े बेटे के पास अमेरिका जाना है घूमने के लिए, हमे भी अच्छा लगा यह जान कर । अपने होटल पर पहुँच कर मैंने 100 का नोट उनको दिया किन्तु उन्होंने मुझे 10 रूपये वापस कर दिए, बोले कि ज्यादा नहीं लूंगा जो तय किया वही लूंगा । और चलते चलते छोटी बेटी के हाथ में बिस्कुट का एक पैकेट भी थमा दिया । सचमुच बहुत बड़ा दिल होता है एक आम आदमी के पास । ये दोनों ही लोग मेरे इस गुजरात भृमण की कुछ अच्छी यादों में शामिल हो गए ।
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Tuesday, June 13, 2017
गरीब आदमी का बड़ा दिल
खबर मिली कि दिनांक 12 जून 2017 को मेरा IIT गांधीनगर में Asst Registrar के पद हेतु इंटरव्यू है । खैर सोचा चलो इस बहाने गुजरात की यात्रा भी हो ही जायेगी, गुजरात में वर्ष 2000 से 2003 तक तीन वर्ष का समय जाम नगर में व्यतीत करने के बाद उडुपी चला गया था । खैर दिनांक 11 जून को गांधीनगर पहुँच गए । इस शहर को खास तरह से बसाया गया है । मुझे अपने अगले दिन के कपड़ों पर प्रेस करानी थी, संसथान के अंदर इस प्रकार की कोई दुकान न होने के कारण संस्थान से 08 किलोमीटर की दुरी पर स्थित बाजार में जाने का निर्णय लिया गया । बाजार में किसी अदद प्रेस वाले को बहुत ढूंढा पर कोई ऐसा स्थान नहीं मिल सका जहाँ पर प्रेस हो जाती । मैं निराश हो ही चला था कि चलो पहले तो लिखित परीक्षा देनी है, उसके बाद पास हुए तो इंटरव्यू होगा । एक अंतिम प्रयास और कर लिया जाय यही सोच कर एक दरजी महोदय से फिर पूछ ही लिया । उन्होंने बताया कि वहां एक पेड़ के नीचे एक आदमी प्रेस करता है । मैं अत्यंत खुश होता हुआ जल्दी ही वहां पहुँच गया । उनसे बात की और बोला कि जल्दी ही कर देंगे तो अच्छा रहेगा क्योंकि उसी ऑटो में वापस भी जाना था । उन्होंने मुझे 30 मिनट बाद आने को बोला । मैं तब तक गांधीनगर के सेक्टर 21 के सब्जी और किराना बाजार में घूमने निकल गया । गुजरात में चाय बहुत ही कड़क मिलती है, बहुत छोटे से गिलास में कड़क चाय भी एक ठेले वाले के यहाँ पी ली । करीब 20 मिनट के ही बाद मैं प्रेस वाले भाई के पास फिर से उपस्थित हो गया । मुझे देखते ही थोड़ा नाराज हुए और बोला कि इतनी जल्दी क्यों आ गए, मैंने उनको नाराज न करने के लिहाज से बोला कि कोई बात नहीं आप आराम से कर लीजिए, मैं इंतज़ार कर लूंगा । खैर उन्होंने मेरा कॉर्य कर ही दिया था । 04 कपड़ों के बीस रुपये बताये थे, मैंने सोचा क़ि इन्होंने मेरा काम जल्दी, यानी अर्जेंट सर्विस में किया है तो दस रुपये ज्यादा दे देता हूँ । मैंने उनको 30 रूपये दे दिए, उन्होंने दस रुपये मुझे वापस कर दिए, मैं बोला रख लीजिए, आपने मेरी इतनी मदद की । किन्तु उन्होंने मुझे वो दस रुपये वापस ही कर दिए, मेरे बहुत ही आग्रह के बाद भी उन्होंने दस रुपये नहीं लिए । बोले कि जो रेट है वही लूंगा, ज्यादा नहीं ।
मैं नतमस्तक हो गया उनकी इस बात को सुन कर । और सोचने लगा कि अमीर आदमी अपना एक पैसा भी नहीं छोड़ता और गरीब किसी का एक पैसा अपने पास नहीं रखता । आज भी सब्जी वाला, सब्जी के साथ हरा धनिया और थोड़ी हरी मिर्च सब्जी के साथ ऐसे ही डाल देता है ।