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Friday, May 17, 2024

ओसला गांव - पांच वर्ष बाद पुनः

 हरकी दून ट्रेक के मार्ग में पड़ने वाले गांव

धातमीर, गंगाड, धरकोटी, पवाणी और ओसला । इस ट्रेक का अंतिम गांव है ओसला जो कि नजदीकी रोड हेड तालुका से 14 किलोमीटर पैदल चल कर आता है । ओसला से हरकी दून 13 किलोमीटर और आगे पड़ता है ।
वर्तमान में तालुका से ओसला तक सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है और सड़क गंगाड गांव तक पहुंच गई है । परंतु कच्ची है और अभी इस पर सिर्फ स्थानीय बोलेरो और ट्रेकिंग कंपनीज की ही गाडियां चल पा रही हैं । आजकल हरकी दून ट्रेक में धातमीर तक सड़क मार्ग से जाया जा रहा है इससे आगे ओसला तथा हरकी दून तक ट्रेक चलती है । उम्मीद है आज से दो साल बाद हरकी दून ट्रेक जाने वाले ट्रेकर सीधे ओसला सड़क मार्ग से जा सकेंगे तब यह ट्रेक मात्र 13 किलोमीटर एक तरफ से रह जाएगी । 
आज का अत्यंत दुर्गम ओसला गांव कल का कल्पा गांव भी बन सकता है ।

 इसी ट्रेक पर पांच वर्ष पहले वर्ष 2019 में इसी माह जाना हुआ था । उस समय का ओसला थोड़ा अलग सा लगा था । और वहां पहुंचना अपने ही आप में एक रोमांचक अनुभव भी था । बाहरी दुनिया से इतनी दूर बिना सड़क से जुड़ा इतना बड़ा गांव देखना अपने ही आपमें एक नितांत ही नवीन अनुभव था । 
वर्तमान में हरकी दून ट्रेक वाले लोग ही इधर वर्ष के कुछ ही महीनों के दौरान आते हैं और उनके रुकने के लिए जगह जगह ट्रेकिंग कंपनियों के कैंप लगे हुए होते हैं जहां ये लोग रात्रि विश्राम करते हैं । सड़क के बन जाने के बाद वर्ष भर बर्फ बारी और बरसात के दिनों के अलावा भी टूरिस्ट यहां आ सकेंगे । 
हालांकि सड़क से जुड़ने के बाद ओसला गांव टूरिस्ट मैप पर आ जाएगा और लोगों ने अभी से इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है । गांव मे होम स्टे बनने शुरू हो गए हैं सड़क से जुड़ने के बाद विभिन्न प्रकार की डिब्बा बंद और पैकिंग वाली खाद्य सामग्री,मैगी इत्यादि बड़ी मात्रा में यहां आनी शुरू होगी जिससे कि इस कचरे का प्रबंधन एक बहुत बड़ी चुनौती होगा । वर्तमान में जो सुपिन नदी साफ सुथरी दिखाई दे रही है डर है कि कहीं इसके आसपास के स्थान पर ही कचरा ना फेंकना शुरू कर दिया जाए । चूंकि ओसला वर्तमान में मात्र एक ग्राम पंचायत ही है और अन्य तमाम ग्राम पंचायतों की ही तरह यहां भी इस कचरे के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं बनी है । 
आने वाले समय के लिए अभी से जागरूक होना होगा, वन विभाग तथा पर्यटन विभाग को अभी से कोई न कोई कार्य योजना बना लेनी चाहिए ताकि इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता ऐसे ही बनी रहे । सड़क का आना यहां के टूरिज्म के लिए तो बहुत ही अच्छा है बस पर्यावरण के लिए भी अच्छा ही सिद्ध हो यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा ।

Friday, May 3, 2024

सांकरी और सैद

कल सांकरी और सौर के साथ ही साथ देवरा गांव भी जाना हुआ । जो लोग प्रसिद्ध केदारकंथा और हर की दून ट्रेक कर चुके हैं वो लोग इन स्थानों से जरूर परिचित होंगे । किंतु जो लोग इधर नहीं आ पाए उनकी जानकारी हेतु बताना उचित होगा कि केदारकंथा एक लगभग 3800 मीटर ऊंचाई की एक ट्रेक है जो कि ज्यादातर लोग बर्फबारी के बाद ही करना पसंद करते हैं । अमूमन पहाड़ों में इतनी ऊंचाई वाले स्थान पर दिसंबर माह में पहली बर्फ गिर ही जाती है जो कि फिर लंबे समय तक रुकी रहती है । अतः यह ट्रेक भी दिसंबर से शुरू होकर अप्रैल तक चलती है और अप्रैल में भी इसकी चोटी और मार्ग पर अच्छी खासी बर्फ मिल जाती है । यह ट्रेक खास तौर पर युवाओं के बीच काफी प्रसिद्ध है । 

दूसरी ट्रेक हरकी दून की है जो केदारकंठा ट्रेक के रुकते ही अप्रैल में शुरू होती है और बरसात के लगभग 15 जून तक चलती है । पहले यह ट्रेक तालुका से शुरू होती थी जिसकी लंबाई 28 किलोमीटर हुआ करती थी वर्तमान में चूंकि धतमीर तक सड़क बन गई है अतः अब शायद 6 किलोमीटर की दूरी कम हो गई होगी । इन दोनो ही ट्रेक का बेस कैंप सांकरी और saud गांव हैं जो कि आसपास ही हैं । अतः इन दोनो ही स्थानों पर स्थानीय गांव वालों ने भी अपने घरों में होम स्टे बना लिए हैं इसके अलावा अनेक युवा व्यवसायों के द्वारा भी युवा पीढ़ी को ध्यान रखते हुए बड़े शहरों की तर्ज पर होटल, cafe, restaurant इत्यादि बना दिए हैं जहां पर आपको बड़े शहरों वाली सभी सुख सुविधाएं मिल जाती हैं । 

चूंकि यहां के अधिकांश होटल और होम स्टे इन दोनो ट्रेक पर ही निर्भर हैं अतः जून से नवंबर तक इक्का दुक्का यात्री ही इधर का रुख करता होगा । ऐसे में ये कुछ महीने ऐसे यात्रियों के लिए उपयुक्त हो सकते हैं जो कम बजट में किसी शांत स्थान पर लंबे समय तक रुकने के इच्छुक हो सकते हैं । इन स्थानों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, इंटरनेट इत्यादि भी मिलता है तथा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक के लिए डेली सरकारी और निजी बसें भी उपलब्ध हो जाती हैं । आसपास आप थोड़ा बहुत टहल सकते हैं और केदारकंथ ट्रेक पर किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ भी जा सकते हैं । इसके अलावा इस क्षेत्र में स्थानीय देवी देवताओं के अत्यंत भव्य और सुंदर मंदिर भी हैं जहां आप दर्शन हेतु जा सकते हैं । ऐसे मंदिर देवरा गांव, नैतवाड़ गांव और सांकरी और saud में भी बने हुए हैं । इन स्थानों पर रुकने की तीन जगह जो मैने देखी हैं एक है रोमा eco लॉज जो कि आधुनिक है जिसके मालिक प्रतीक और मीनाक्षी हैं जिनका नंबर है 8920471234,9310427302 है ।

दूसरा स्थान गांव के बीच लकड़ी का बना इनका अपना ही घर है जिनका नंबर श्री प्रवेश रावत जिनका होम स्टे अपने ही घर में है 9528720027 है और तीसरा स्थान देवरा गांव में जहां दानवीर कर्ण महाराज का मंदिर है जिसे पुणे की रहने वाली एक युवा सरूण चलाती हैं जिनका नंबर 9960447889 है । आपको तीनों ही स्थान अच्छे लगेंगे ।