हरकी दून ट्रेक के मार्ग में पड़ने वाले गांव
धातमीर, गंगाड, धरकोटी, पवाणी और ओसला । इस ट्रेक का अंतिम गांव है ओसला जो कि नजदीकी रोड हेड तालुका से 14 किलोमीटर पैदल चल कर आता है । ओसला से हरकी दून 13 किलोमीटर और आगे पड़ता है ।
वर्तमान में तालुका से ओसला तक सड़क निर्माण का कार्य चल रहा है और सड़क गंगाड गांव तक पहुंच गई है । परंतु कच्ची है और अभी इस पर सिर्फ स्थानीय बोलेरो और ट्रेकिंग कंपनीज की ही गाडियां चल पा रही हैं । आजकल हरकी दून ट्रेक में धातमीर तक सड़क मार्ग से जाया जा रहा है इससे आगे ओसला तथा हरकी दून तक ट्रेक चलती है । उम्मीद है आज से दो साल बाद हरकी दून ट्रेक जाने वाले ट्रेकर सीधे ओसला सड़क मार्ग से जा सकेंगे तब यह ट्रेक मात्र 13 किलोमीटर एक तरफ से रह जाएगी ।
आज का अत्यंत दुर्गम ओसला गांव कल का कल्पा गांव भी बन सकता है ।
इसी ट्रेक पर पांच वर्ष पहले वर्ष 2019 में इसी माह जाना हुआ था । उस समय का ओसला थोड़ा अलग सा लगा था । और वहां पहुंचना अपने ही आप में एक रोमांचक अनुभव भी था । बाहरी दुनिया से इतनी दूर बिना सड़क से जुड़ा इतना बड़ा गांव देखना अपने ही आपमें एक नितांत ही नवीन अनुभव था ।
वर्तमान में हरकी दून ट्रेक वाले लोग ही इधर वर्ष के कुछ ही महीनों के दौरान आते हैं और उनके रुकने के लिए जगह जगह ट्रेकिंग कंपनियों के कैंप लगे हुए होते हैं जहां ये लोग रात्रि विश्राम करते हैं । सड़क के बन जाने के बाद वर्ष भर बर्फ बारी और बरसात के दिनों के अलावा भी टूरिस्ट यहां आ सकेंगे ।
हालांकि सड़क से जुड़ने के बाद ओसला गांव टूरिस्ट मैप पर आ जाएगा और लोगों ने अभी से इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है । गांव मे होम स्टे बनने शुरू हो गए हैं सड़क से जुड़ने के बाद विभिन्न प्रकार की डिब्बा बंद और पैकिंग वाली खाद्य सामग्री,मैगी इत्यादि बड़ी मात्रा में यहां आनी शुरू होगी जिससे कि इस कचरे का प्रबंधन एक बहुत बड़ी चुनौती होगा । वर्तमान में जो सुपिन नदी साफ सुथरी दिखाई दे रही है डर है कि कहीं इसके आसपास के स्थान पर ही कचरा ना फेंकना शुरू कर दिया जाए । चूंकि ओसला वर्तमान में मात्र एक ग्राम पंचायत ही है और अन्य तमाम ग्राम पंचायतों की ही तरह यहां भी इस कचरे के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं बनी है ।
आने वाले समय के लिए अभी से जागरूक होना होगा, वन विभाग तथा पर्यटन विभाग को अभी से कोई न कोई कार्य योजना बना लेनी चाहिए ताकि इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता ऐसे ही बनी रहे । सड़क का आना यहां के टूरिज्म के लिए तो बहुत ही अच्छा है बस पर्यावरण के लिए भी अच्छा ही सिद्ध हो यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा ।