नवरात्रों में प्रयास रहता है कि किसी देवी के मंदिर जाकर दर्शन करने का सौभग्य प्राप्त हो तो अच्छा रहता है । इसी क्रम में आज चकराता ब्लॉक के इन्ड्रोलि गांव स्थित काली माता मंदिर पैदल जाने का विचार बनाया । चकराता से जंगलात चौकी, फिर बजरी खान से होते हुए मोहना चौकी और कंधाड़ गांव के बाद इन्ड्रोलि । मैं सुबह 9 बजे चलकर लगभग 11 बजे इन्ड्रोलि गांव पहुंच गया था । मन्दिर बन्द मिला तभी एक छोटी सी बालिका मिली जो अपने छोटे भाई को गोद मे उठाये कहीं जा रही थी । पूछने पर बताया कि खेत मे जा रही है मैंने उससे कहा कि फिलहाल गांव में जितनी भी छोटी बालिकाएं हैं क्या वो उनको मन्दिर बुला सकती है बालिका खुशी खुशी तैयार हो गयी, लेकिन अपने छोटे से भाई को मेरे पास ही ध्यान रखने के लिए छोड़ गई । उस बालक का मन मेरे बैग में रखे 01 बिस्कुट के पैकेट ने लगाए रखा । थोड़ी ही देर में एक एक कर 9 बालिकाएं मन्दिर में एकत्रित हो गयी । गांव की ही दुकान से उनके लिए बिस्कुट मंगाए और सभी को दस दस रुपये देकर उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया । बच्चियां बहुत खुश हुई । इसी बीच एक दो की माताएं भी आई और चाय पीकर जाने का निमंत्रण दिया किन्तु मुझे चलना था । बच्चियों से मिलना एक अच्छा अनुभव रहा ।
आज की पैदल यात्रा लगभग 28 किलोमीटर आना जाना ।
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