हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चूड़धार महादेव व शीलगुर महाराज मन्दिर के विषय मे बहुत सारे लोगों से सुना था, स्थान के फोटो भी देखे और देख कर इस स्थान पर भी जाने की इच्छा हो ही उठी । साथ मे अपने साथी श्री आर्यन जी को बोला वो भी सहर्ष तैयार हो गए । चूड़धार की यात्रा तीन तरफ से की जा सकती है । हमने वहां तक पहुंचने के लिए हिमाचल की सीमा से लगे उत्तराखंड के त्यूणी नामक स्थान से अपनी यात्रा शुरू की । खैर हमने भगवान शिव का स्मरण किया और अपनी यात्रा सराह से चूड़धार हेतु आरम्भ कर दी । रास्ते की शुरुआत ही पास ही में हो रही एक स्कूल की सुबह की प्रार्थना के साथ हुई । सेब के बगीचे के बीच से एक पगडंडी से होते हुए फिर चूड़धार वाले मुख्य मार्ग पर पहुंच गए । ऊपर से दर्शन कर काफी यात्री वापस भी आ रहे थे जो कि शायद एक दिन पहले वहां पहुंच कर रात को रुकने के बाद वापस आ रहे थे । हमने उनसे
यात्रा के आरंभ में जितने भी लोगों से रास्ता इत्यादि पूछा सभी ने बोला कि वहां रात को तो रुकना ही पड़ेगा, एक ही दिन में वापसी संभव नहीं हो पाएगी । हमने सोचा कि चलो यदि वापस नहीं भी आ सके तो रात वहीं रुक जाएंगे । हमने अपनी यात्रा त्यूणी से कार द्वारा सुबह के करीब 7 बजे शुरू कर दी और अताल, मीनस पुल होते हुए करीब 9 बजे हिमाचल के नेरवा नामक स्थान पर पहुंच गए । चूंकि सुबह नाश्ता नहीं किया था तो नेरवा में एक दुकान पर रुक कर दोनों ने दो दो परांठे खा लिए ताकि फिर पूरे दिन कुछ भी खाने की जरूरत न पड़े । जो लोग इस यात्रा को कर चुके थे उन्होंने बताया कि रास्ते मे चाय इत्यादि की दुकानें तो हैं । नाश्ता करने के बाद करीब 10 बजे हम सराह नाम की जगह पहुंच गए जहां से की चूड़धार महादेव की पैदल यात्रा शुरू होती है ।
सराह भी एक बहुत ही सुंदर और शांत जगह लगी, यहां दो अत्यंत विशिष्ट शैली में बने दो मंदिर भी दिखाई दिए । हमने अपनी यात्रा शुरू करने से पहले पानी इत्यादि लिया और चाय पीने एक दुकान पर बैठ गए । दुकानदार भाई से भी पूछा कि क्या हम आज ही वापस आ जाएंगे ?? उन्होंने भी बताया कि आज वापसी संभव नहीं होगी रात वहीं रुक कर सुबह आ जाना ।
हमने उनसे उनका ऊपर से चलने का समय पूछ कर अनुमान लगा कि इनको नीचे आने में कितना टाइम लगा और हमको कितना टाइम ऊपर तक जाने में लग जायेगा । हमने इस हिसाब से अंदाज लगाया कि हमको कम से कम 4 से 5 घंटे का समय ऊपर जाने में लग जाना चाहिए । और अगर हम 2 बजे तक ऊपर पहुंच गए तो फिर एक घंटा वहां रुक कर 3 बजे नीचे के लिए चलना शुरू कर देंगे और आराम से 6 बजे तक नीचे आ जाएंगे और फिर 9 बजे तक वापस त्यूणी भी पहुंच जाएंगे । चूड़धार की चढ़ाई करीब 9 किलोमीटर की है किंतु यह लगभग सीधी चढ़ाई का ही रास्ता है, रास्ते मे जंगल तो है लेकिन रास्ता काफी चौड़ा है और रास्ते पर कोई घास वगैरा नहीं जमी और रास्ता साफ सुथरा है । करीब 3 घंटे चलने के बाद हमे लगा कि हम बस अब पहुंचने ही वाले हैं, क्योंकि एक स्थान पर बहुत सारी चाय की दुकानें दिखाई दी, हमने एक दुकान पर रुक कर चाय पी और वहां रखे दिखाई दिए मावे के बने पेड़े । चाय के साथ इन पेड़ों का स्वाद बाद ही गजब का लगा । चाय पीकर और मावे के बने मीठे पेड़े खा शरीर मे जान सी आ गयी और फिर हम आगे को बढ़े ।
चाय की इन दुकानों को।पार करने के बाद हमे घास का एक बहुत बड़ा मैदान सा दिखाई दिया तथा वहीं ऊपर गुफा में एक दो मंदिर भी बने दिखाई दिए । लेकिन मुख्य मंदिर शीलगुर महाराज का और भी आगे था । खैर हम चलते रहे । करीब 1 बजे हम शीलगुर महाराज के मंदिर पहुंच गए, अब अगले लक्ष्य था वहां से ऊपर सबसे ऊंचे शिखर पर दिखाई दे रहे शिवजी महाराज । खैर चूंकि अब भगवान शिव की उस ऊंचे शिखर पर विराजमान प्रतिमा के दर्शन होने शुरू हो गए थे तो मन एक जोश भी आ गया और मैं ऊपर की और बढ़ चला । मैंने शायद थोड़ा कठिन वाला रास्ता ले लिया था जो कि शीलगुर मन्दिर से बाएं हाथ की तरफ से होकर जाता दिखाई दिया । खैर करीब और 45 मिनट की चढ़ाई के बाद मैं ऊपर पहुंच ही गया और शिवजी के दर्शन किये । ऊपर से चारों तरफ का दृश्य बहुत ही सुंदर दिखाई दे रहा था, मन्दिर के पुजारी बाबा जी ने बताया कि इस स्थान से उत्तराखंड के चारों धाम के दर्शन भी हो जाते हैं और रात में तो चकराता की लाइट भी दिखाई दे जाती हैं । इसी बीच मेरे साथी आर्यन जी भी ऊपर पहुंच गए हमने कुछ फोटो और खींचे और शिवजी के दर्शन कर नीचे की और चले । नीचे आकर शीलगुर महाराज के भी दर्शन किये और फिर सराह की और बढ़ लिए । रास्ते मे रुक कर उसी चाय की दुकान पर चाय पी, पेड़े भी खाए और करीब 6 वजे हम वापस सराह पहुंच ही गए । उसी चाय की दुकान पर आकर फिर से चाय पी उनको थोड़ा ताज्जुब सा हुआ कि हम दर्शन कर वापस आ गए हैं । और इस प्रकार हमारी चूड़धार यात्रा समाप्त हुई ।
सुंदर वृत्तान्त
ReplyDeleteबहुत सुंदर भाई
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ReplyDeleteVery nicely written 👍
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